रायपुर
लइका घर' से संवर रहा ग्रामीण बचपन: कुपोषण पर प्रहार और शिक्षा की मजबूत नींव
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में बच्चों के स्वस्थ बचपन, समुचित पोषण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को एक साथ जोड़ने की अनूठी पहल के रूप में ‘लइका घर’ तेजी से विकसित हो रहे हैं। बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और बाल-अनुकूल वातावरण प्रदान करने के साथ-साथ उनके शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और सामाजिक विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना समाज के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला रख रही है।
लइका घर' से संवर रहा ग्रामीण बचपन: कुपोषण पर प्रहार और शिक्षा की मजबूत नींव
बचपन से विद्यालय तक: एक ही परिसर में संपूर्ण विकास
प्रारंभिक अवस्था में ही बच्चों की जरूरतों पर ध्यान देकर कुपोषण की समस्या को दूर करने, उनकी सीखने की क्षमता विकसित करने और शिक्षा से निरंतर जोड़े रखने की दिशा में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।
इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें बचपन से लेकर विद्यालय तक की सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराई जाती हैं। नगरी विकासखंड के ग्राम सियादेही का मॉडल इसका बेहतरीन उदाहरण है, जहां सात माह से तीन वर्ष तक के बच्चों की देखभाल के लिए लइका घर, तीन से छह वर्ष के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी और उसके बाद प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा की सुविधा एक ही प्रांगण में संचालित हो रही है। इस एकीकृत व्यवस्था से बच्चों के विकास के विभिन्न चरणों में निरंतरता बनी रहती है। अभिभावकों को बच्चों की देखभाल और शिक्षा के लिए अलग-अलग स्थानों पर भटकना नहीं पड़ता, जिससे बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होती है और शिक्षा के प्रति उनकी रुचि व आत्मविश्वास मजबूत होता है।
खेल-खेल में सर्वांगीण विकास पर जोर
लइका घरों में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेल-खेल में सीखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यहां रंग-बिरंगे शैक्षणिक चित्रों, वर्णमाला, अंकों, फल-सब्जियों, पशु-पक्षियों और दैनिक जीवन से जुड़ी सामग्री के माध्यम से शिक्षा दी जाती है। आयु के अनुरूप खेल सामग्री, रचनात्मक गतिविधियां और सहभागितापूर्ण अभ्यास बच्चों की जिज्ञासा, भाषा कौशल, कल्पनाशक्ति और सामाजिक व्यवहार को निखारने में सहायक साबित हो रहे हैं। इसके साथ ही स्वच्छता, नियमित देखभाल और पोषण संबंधी आवश्यकताओं पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से संचालित होने वाले ये केंद्र आंगनबाड़ी सेवाओं और विद्यालयों के साथ बेहतर समन्वय बिठाकर बच्चों की जरूरतों को समय पर पूरा कर रहे हैं।
जिले में इन बाल हितैषी सुविधाओं का दायरा बढ़ाने के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। नगरी विकासखंड में वर्तमान में 124 लइका घर संचालित हैं और इस वर्ष 40 नए केंद्र शुरू करने की योजना है। वहीं मगरलोड विकासखंड में छह केंद्र पहले से कार्यरत हैं, जिन्हें अक्टूबर अंत तक बढ़ाकर आठ और दिसंबर 2026 तक 20 करने का लक्ष्य रखा गया है। इन केंद्रों के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकाधिक बच्चों तक बाल हितैषी सुविधाएं पहुंच सकेंगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता से यह पहल बच्चों को स्वस्थ, सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में पूरी तरह सफल हो रही है।

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