नई दिल्ली
राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सीजेआई सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी की है. राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट वाले विरोध मार्च को लेकर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका इतनी कमजोर नहीं है. सुप्रीम कोर्ट को कोई डरा-धमका नहीं सकता. ये बेकार की कोशिशें हैं और इनपर कोई ध्यान नहीं देता. सीजेआई सूर्यकांत ने यह टिप्पणी तब की, जब सीनियर वकील गौरव भाटिया ने दलील दी. गौरव भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उसक दिन सुप्रीम कोर्ट में जो हुआ, वह अभूतपूर्व था।
दरअसल, आज यानी 15 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है. यह सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत के बेंच के समक्ष हुई. सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट तक विरोध मार्च को लेकर कहा, ‘कोई भी सुप्रीम कोर्ट को डराने या धमकाने की कोशिश नहीं कर सकता. ये बेकार की कोशिशें हैं और इन पर कोई ध्यान नहीं देता।
सीजेआई सूर्यकांत बोले- कोई डरा धमका नहीं सकता
सीजेआई सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में राजनीतिक जुलूस निकाले जाने पर कड़ी आपत्ति जताई. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘हमें पता है कि अदालत के बाहर क्या कहा जा रहा है और अदालत के अंदर क्या कहा जा रहा है. हम किसी काल्पनिक दुनिया में नहीं रह रहे हैं. हमें हर बात की जानकारी है. सुप्रीम कोर्ट को कोई डराने-धमकाने की कोशिश नहीं कर सकता. न्यायपालिका इतनी कमजोर नहीं है कि उसे डराया-धमकाया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने नेता प्रतिपक्ष को लगाई फटकार
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आचरण पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने तीखी टिप्पणी की है. CJI ने कहा है कि राहुल गांधी को अपने आचरण पर सफाई देनी होगी. राहुल गांधी के बर्ताव पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उन्हें फटकार लगाई और उनके इस कदम पर उनसे स्पष्टीकरण मांगा।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने कहा कि न्यायपालिका को "कोई भी डरा-धमका नहीं सकता." राहुल गांधी के आचरण पर सवाल उठाते हुए चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताई कि सुप्रीम कोर्ट मार्च और उसके दौरान हुई अव्यवस्था पर याचिकाकर्ता राहुल गांधी को सफाई देनी होगी. यानी अपनी मंशा स्पष्ट करनी होगी।
सीजेआई ने राहुल गांधी की ओर से पेश हो रहे सीनियर वकील कपिल सिब्बल को कहा, "उन्हें (राहुल गांधी) सफाई देनी होगी।
सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी:
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को कोई डराने-धमकाने की कोशिश नहीं कर सकता।
अदालत पर दबाव बनाने की कोशिशों पर वह ध्यान नहीं देता।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका इतनी कमजोर नहीं है कि उसे डराया-धमकाया जा सके।
किसने उठाया राहुल के मार्च का मसला
दरअसल, सीनियर वकील वकील गौरव भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में राजनीतिक जुलूस निकाले जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा था कि यह अस्वीकार्य है. उन्होंने इसे न्यायपालिका को डराने-धमकाने और उस पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया. उन्होंने कहा कि उस दिन सुप्रीम कोर्ट में जो हुआ, वह अभूतपूर्व है. इस पर ही मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोई भी न्यायपालिका को डरा-धमका नहीं सकता।
इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने 'SIR' प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर INDIA गठबंधन और AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी की ओर से दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट मुख्य मामले के साथ इन मामलों की सुनवाई करेगा।
12 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी INDIA ब्लॉक नेताओं के साथ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया था. उन्होंने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और “वोट चोरी” के आरोपों के खिलाफ याचिका दाखिल की. राहुल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR रोकने की मांग है।
बाद में राहुल ने सुप्रीम कोर्ट जाकर खुद एक संयुक्त याचिका दायर की, जिसमें ECI के SIR से जुड़े फैसलों को चुनौती दी गई है. इसी मामले की सुनवाई गुरुवार को हुई।
राहुल पर तीखी टिप्पणी
अदालत ने SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने के खिलाफ दायर एक याचिका पर राहुल गांधी और अन्य लोगों को नोटिस जारी किया. अन्य लोगों में राहुल गांधी के अलावा इंडियन नेशनल कांग्रेस, मल्लिकार्जुन खडगे, केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी, अखिलेश यादव और महुआ मोइत्रा भी शामिल हैं।
साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि कोई भी न्यायपालिका पर दबाव नहीं डाल सकता।
विपक्षी नेताओं द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए, मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी किया।
पीठ ने कहा, "हम नोटिस जारी कर रहे हैं… और इसे पहले से लंबित मामलों के साथ जोड़ रहे हैं. लेकिन हम याचिकाकर्ताओं में से एक से उनके आचरण के बारे में पूछना चाहेंगे।
सुनवाई के दौरान कुछ वकीलों ने SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस नेता के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने का जिक्र किया।
कोर्ट को कोई भी डरा-धमका नहीं कर सकता
गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अंदर जो घटना हुई, उसे होना नहीं चाहिए था.
गौरव भाटिया ने अदालत को बताया कि लगभग 200 वकीलों ने एक दावे पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें उन्होंने वकीलों को डराने-धमकाने की कथित कोशिशों पर चिंता व्यक्त की है. इस पर CJI ने कहा कि कोर्ट को कोई भी डरा-धमका नहीं कर सकता है।
गौरव भाटिया ने कहा कि यह स्वीकार्य नहीं है कि यह अदालत राजनीतिक जुलूसों में उलझी रहे. सुप्रीम कोर्ट में जो हुआ, वह नहीं होना चाहिए था. उन्होंने कहा है कि इस तरह की डराने-धमकाने की कोशिशें नहीं होनी चाहिए।
इस CJI ने कहा कि ये कमजोर कोशिशें हैं, जिन पर कोई ध्यान नहीं देता. बाहर वे बयान देते हैं. हम कोई अलग-थलग दुनिया में नहीं बैठे हैं, हमें सब पता है कि क्या हो रहा है।
जंतर-मंतर को डिनोटिफाई करने पर भी नोटिस
सुप्रीम कोर्ट जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल के रूप में हटाए जाने (डी-नोटिफिकेशन) को चुनौती देने वाली याचिका पर भी विचार करने के लिए सहमत हो गया है. अदालत ने इस मामले में दिल्ली पुलिस के आदेश के खिलाफ नोटिस जारी किया है।
जंतर मंतर को डिनोटिफाई किए जाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या यह फैसला इस कोर्ट की कुछ मौखिक टिप्पणियों की वजह से लिया गया या फिर इसे एक आम प्रदर्शन स्थल के रूप में इस्तेमाल करने की उपयोगिता पर सोच-विचार कर किया गया था?
SG तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस निर्णय का आधार नहीं है. इस मसले पर कमेटी का गठन बहुत पहले ही कर दिया गया था. कमेटी ने एक विस्तृत रिपोर्ट दी है।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ज्यादतियों वाली अर्जियों पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को प्रदर्शन से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है. इसी तरह सभी निजी पक्ष भी वीडियो सुरक्षित रख सकते हैं ताकि उन्हें अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया जा सके।
राहुल गांधी की याचिका में क्या है
सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष के कई अन्य नेताओं ने याचिका दायर की है. इन याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने और गड़बड़ियों का आरोप लगाया गया है. इस याचिका पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई की. बीते सोमवार को गांधी और विपक्ष के कई अन्य नेता याचिका दायर करने के लिए उच्चतम न्यायालय पहुंचे थे।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में और तकनीकी विशेषज्ञों तथा अन्य प्रतिष्ठित नागरिकों की सहायता से एक स्वतंत्र समिति के गठन का अनुरोध किया गया है, ताकि समयसीमा के भीतर एसआईआर के दौरान किए गए नाम विलोपनों और संशोधनों का स्वतंत्र ऑडिट किया जा सके. शहर में हाल में मतदाता सूचियों के एसआईआर में कथित अनियमितताओं को लेकर सीईसी के इस्तीफे की मांग करते हुए कई विरोध प्रदर्शन हुए हैं।

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